Pocket Option भारत FAQ 2026: आपके सवालों के जवाब

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Pocket Option भारत FAQ 2026: आपके सवालों के जवाब

वैधता और टैक्स

सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही है, और इसका ईमानदार जवाब हाँ या ना नहीं है — बल्कि यह कि मंच ऑफशोर है और ज़िम्मेदारी व्यक्ति पर आती है।

क्या यह भारत में वैध है? हम न यह लिखते हैं कि यह भारत में क़ानूनी है, न यह कि प्रतिबंधित है — दोनों बातें अतिशयोक्ति हैं और दोनों का प्रमाण मौजूद नहीं। जो सत्यापित है वह इतना है: ऑपरेटर की प्रकाशित सूचना में जिन बाज़ारों को वह सेवा नहीं देता, उनकी सूची में भारत का नाम नहीं है — और सूची में न होना अनुमति या मान्यता नहीं होती। इसके साथ यह भी सत्यापित है कि कोई भारतीय पंजीकरण प्रकाशित नहीं है। इन दोनों को जोड़कर जो बनता है वह ग्रे क्षेत्र है, और उसका जोखिम व्यक्ति पर आता है। Pocket Option की वैधता वाला पन्ना इसी बारीकी को पूरा खोलता है।

SEBI और RBI क्या कहते हैं? यहाँ एक बात दो टूक: हम यह दावा नहीं करते कि किसी भारतीय प्राधिकरण ने इस ब्रांड के बारे में कोई आदेश दिया, कोई कार्रवाई की या उसे किसी सूची में रखा — इसका प्रमाण किसी दिशा में हमारे पास नहीं है। जो सामान्य ढाँचा मौजूद है वह यह है कि SEBI अपंजीकृत इकाइयों के साथ लेन-देन को लेकर सामान्य निवेशक-चेतावनियाँ जारी करता है, और भारतीय निवेशक-संरक्षण के तंत्र केवल पंजीकृत मध्यस्थों पर लागू होते हैं। पैसा सीमा पार भेजने पर FEMA और LRS का ढाँचा लागू होता है, जिसमें उद्देश्य से जुड़ी शर्तें हैं और अनुपालन का भार भेजने वाले पर रहता है।

"ग्रे क्षेत्र" का व्यावहारिक मतलब क्या है? यह शब्द अक्सर टालमटोल की तरह इस्तेमाल होता है, इसलिए इसे ठोस रूप में रख देते हैं। इसका मतलब यह है कि मंच तक पहुँचने में कोई तकनीकी रुकावट नहीं दिखती, पर उसके पीछे भारतीय ढाँचे का कोई सहारा भी नहीं है। नतीजा तीन जगह दिखता है: पैसा भेजते समय, जहाँ बैंक या कार्ड जारीकर्ता भुगतान अस्वीकार या वापस कर सकते हैं; विवाद के समय, जहाँ कोई भारतीय शिकायत-निवारण लागू नहीं होता; और कर के समय, जहाँ घोषणा की ज़िम्मेदारी पूरी तरह आपकी रहती है। इसलिए यह सवाल "क्या मुझे इजाज़त है" से ज़्यादा इस बारे में है कि गड़बड़ होने पर आपके पास क्या बचता है।

मुनाफ़े पर कर कैसे लगता है? इस पन्ने पर आपको कोई दर, कोई सीमा, कोई तारीख़ और कोई फ़ॉर्म नंबर नहीं मिलेगा — यह जान-बूझकर है, क्योंकि ऐसी जानकारी व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है और ग़लत सामान्यीकरण महँगा पड़ता है। जो सिद्धांत साफ़ है वह यह है: एक ऑफशोर मंच से किसी स्वतः कर-कटौती या भारतीय अधिकारियों को रिपोर्टिंग की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, इसलिए आय की घोषणा और, जहाँ क़ानून माँगता है, विदेशी संपत्ति या खातों का प्रकटीकरण करदाता की अपनी ज़िम्मेदारी रहती है। यह सामान्य जानकारी है, कर या क़ानूनी सलाह नहीं, किसी योग्य भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट से बात कीजिए। ढाँचे को समझने के लिए Pocket Option टैक्स वाला पन्ना पढ़िए।

वैधता का सवाल हाँ-ना में नहीं सुलझता; उसका असली रूप यह है कि सहारा किसके पास है, और अपंजीकृत ऑफशोर इकाई के मामले में वह किसी के पास नहीं।

पहुँच और ऐप

इन सवालों के जवाब सबसे व्यावहारिक हैं और सबसे कम विवादित भी। नीचे हर सवाल का छोटा जवाब है, और यह भी कि विस्तार कहाँ मिलेगा।

सवालछोटा जवाबगहराई से कहाँ
लॉगिन कैसे करूँ?वही पता ब्राउज़र में ख़ुद टाइप कीजिए या बुकमार्क से खोलिए; किसी संदेश के लिंक से कभी नहींPocket Option लॉगिन
पासवर्ड भूल गया तो?मंच की अपनी रीसेट प्रक्रिया से; कोई सपोर्ट एजेंट पासवर्ड या OTP नहीं माँगताअकाउंट एक्सेस
po.trade क्या है?उसी सेवा का दूसरा मोर्चा; साझा लॉगिन या साझा क़ानूनी इकाई हम सिद्ध नहीं मानतेpo.trade ऐप
ऐप कहाँ से लूँ?ऑपरेटर के अपने पते या आधिकारिक स्टोर से; किसी बाहरी फ़ाइल स्रोत से नहींPocket Option ऐप
डेस्कटॉप पर चलेगा?ब्राउज़र, Android, iOS और डेस्कटॉप, चारों रास्ते विज्ञापित हैंPocket Option डाउनलोड
KYC में क्या लगेगा?श्रेणियाँ: फोटो पहचान, पते का प्रमाण, भुगतान साधन का प्रमाण; कोई तय भारतीय दस्तावेज़ हम नहीं बतातेवेरिफ़िकेशन और KYC

ऐप से जुड़ा एक सवाल अलग से ध्यान माँगता है, क्योंकि हिंदी में खोज करने वालों को सबसे ज़्यादा जोखिम यहीं मिलता है। बाहरी फ़ाइल से इंस्टॉल करने वाले रास्ते पर नक़ली और छेड़छाड़ किए गए बिल्ड आम हैं, इसलिए हम किसी मिरर का नाम तक नहीं लेते और उसे रास्ता नहीं बताते। इसके बजाय जाँचने लायक बात यह है कि इंस्टॉल के समय ऐप कौन-सी अनुमतियाँ माँग रहा है: SMS पढ़ने की, डिवाइस एडमिन बनने की, एक्सेसिबिलिटी सेवा की या दूसरे ऐप इंस्टॉल करने की माँग किसी ट्रेडिंग ऐप को नहीं चाहिए।

दूसरे मोर्चे को लेकर भ्रम इसलिए फैलता है क्योंकि एक ही सेवा दो नामों से दिखती है, और नक़ल करने वाले ठीक इसी गुंजाइश में घुसते हैं: पाठक पहले से मान चुका होता है कि "एक और पता हो सकता है", इसलिए तीसरा, नक़ली पता भी सहज लगने लगता है। इसका हल तकनीकी नहीं, आदत का है: जिस पते पर आपका खाता बना है उसे बुकमार्क कर लीजिए और आगे हमेशा वहीं से जाइए। यह भी मान लीजिए कि एक जगह का लॉगिन दूसरी जगह चलेगा: यह हम सिद्ध नहीं मानते, और इस मान्यता की क़ीमत आमतौर पर एक अनचाहा दूसरा खाता होती है, जो वेरिफ़िकेशन और निकासी दोनों उलझा देता है।

और वेरिफ़िकेशन को लेकर एक बात साफ़ रखिए: नाम, पता या भुगतान-साधन का मेल न खाना ही अस्वीकृति की सबसे आम वजह है, और उसका सही समाधान एक ही दिशा में होता है: खाते का रिकॉर्ड अपने असली दस्तावेज़ों से मिलाना, उलटा नहीं। ऐसे दस्तावेज़ भेजना जो पहचान या निवास को ग़लत दिखाते हों, धोखाधड़ी है।

पहुँच से जुड़ी लगभग हर समस्या का हल एक ही आदत में है: पता ख़ुद टाइप कीजिए और इंस्टॉल आधिकारिक रास्ते से कीजिए।

पैसे के सवाल

यहाँ हम कोई रकम नहीं छापते (न डॉलर में, न रुपये में) क्योंकि ये आँकड़े सत्यापित नहीं हैं और बदलते रहते हैं। जो छापने लायक है वह ढाँचा है।

न्यूनतम डिपॉज़िट क्या है? बहुत कम प्रवेश-राशि विज्ञापित की जाती है, पर सटीक आँकड़ा गतिशील पन्ने पर बदलता है और हम उसे सत्यापित नहीं कर सके: इसलिए कोई संख्या नहीं, और कोई रुपये-रूपांतरण भी नहीं, क्योंकि वह विनिमय दर के साथ हिलता है। मौजूदा आँकड़ा पैसा भेजने से ठीक पहले मंच पर देख लीजिए। एक बात जोड़ने लायक है: कम प्रवेश-राशि जोखिम कम होने का संकेत नहीं, आसान शुरुआत का संकेत है।

क्या मैं UPI इस्तेमाल कर सकता हूँ? इसका ईमानदार जवाब है, हम पुष्टि नहीं कर सकते। UPI, बैंक ट्रांसफ़र, कार्ड, वॉलेट और क्रिप्टो वे श्रेणियाँ हैं जिनकी चर्चा होती है, पर किसी ख़ास खाते पर किसी ख़ास समय पर कौन-सा रास्ता चालू है यह मंच पर ही दिखता है, और भारतीय बैंक तथा कार्ड जारीकर्ता ऑफशोर ट्रेडिंग व्यापारियों को भुगतान अक्सर अस्वीकार या वापस कर देते हैं। हम किसी ऐप, बैंक या भुगतान सेवा का नाम समर्थित के रूप में नहीं लिखते। फ़ंडिंग के तरीके वाला पन्ना हर श्रेणी का व्यावहारिक अर्थ खोलता है।

निकासी कैसे काम करती है? एक नियम सब पर भारी है: पैसा आमतौर पर उसी रास्ते लौटता है जिससे आया था। इसीलिए फ़ंडिंग हमेशा अपने ही नाम के खाते या कार्ड से कीजिए, और किसी "टॉप-अप एजेंट" के ज़रिए कभी नहीं, वह निकासी के समय ही टूटता है और ठगी का जाना-पहचाना रास्ता भी है। किसी प्रोसेसिंग समय की गारंटी हम नहीं देते, क्योंकि वह सत्यापित नहीं है। पूरी प्रक्रिया Pocket Option निकासी वाले पन्ने पर है।

अगर भुगतान अस्वीकार या वापस हो जाए तो? यह भारतीय पाठकों के साथ अक्सर होता है और घबराने की बात नहीं है, बशर्ते आप सही क्रम रखें। पहले अपने बैंक या कार्ड जारीकर्ता के संदेश को पढ़िए, क्योंकि अस्वीकृति वहीं से आती है, मंच से नहीं। दूसरा, वही भुगतान बार-बार दोहराने से बचिए, कई असफल कोशिशें आपके अपने खाते पर निगरानी बढ़ा देती हैं। तीसरा, किसी और के खाते, कार्ड या किसी बिचौलिए के ज़रिए वही भुगतान करवाने की कोशिश बिल्कुल मत कीजिए; यह निकासी के समय टूटता है और अक्सर ठगी में बदल जाता है। और अगर रकम कट गई पर खाते में नहीं दिखी, तो रिकॉर्ड सँभालकर रखिए और मंच के अपने सपोर्ट चैनल से ही बात कीजिए।

  • बोनस लेने से पहले उसकी शर्तें पढ़िए, वह बैलेंस को किसी टर्नओवर शर्त तक बाँध सकता है और हमेशा वैकल्पिक होता है।
  • प्रोमो कोड की कोई सूची हम प्रकाशित नहीं करते; इंटरनेट पर घूमते "चालू कोड" अक्सर गढ़े हुए होते हैं।
  • वेरिफ़िकेशन पहले निपटा लीजिए, पहली निकासी के समय नहीं, देरी की सबसे आम वजह यही होती है।
  • सीमा पार भेजे गए पैसे पर FEMA और LRS से जुड़ी ज़िम्मेदारी तथा मुनाफ़े की रिपोर्टिंग आपकी अपनी रहती है।

पैसे से जुड़े हर सवाल का सबसे उपयोगी जवाब एक ही वाक्य है: पैसा उसी रास्ते लौटता है जिससे गया था।

ट्रेडिंग और सीखना

इन तीन सवालों में सबसे उपयोगी वही है जिसका जवाब मुफ़्त है, अभ्यास खाता। बाक़ी दो के जवाब में सबसे ज़रूरी हिस्सा वह है जो हम नहीं लिखते।

कौन-सी रणनीतियाँ मौजूद हैं? प्रचलित तरीक़े चार्ट पढ़ने पर टिके होते हैं: रुझान की दिशा में सौदा, दायरे में उलटफेर, संकेतकों का मेल, और समय-सीमा का चुनाव। इनमें से कोई भी उस बुनियादी असमानता को नहीं बदलता कि जीत पर मुनाफ़ा लगाई रकम से कम और हार पर पूरी रकम जाती है। इसलिए रणनीति का असली काम बढ़त बनाना नहीं, अनुशासन बनाना है: तय रकम, तय सीमा, तय रुकने का बिंदु। Pocket Option रणनीति और Pocket Option ट्रेडिंग रणनीतियाँ वाले पन्ने इसे व्यावहारिक रूप में रखते हैं।

क्या सिग्नल मदद करते हैं? किसी सिग्नल सेवा, चैनल या बॉट की सफलता-दर का कोई आँकड़ा हम न छापते हैं, न दोहराते हैं, ऐसे आँकड़ों का कोई सत्यापित माप मौजूद नहीं होता। जो ठोस बात कही जा सकती है वह जोखिम की तरफ़ से है: किसी भी बाहरी उपकरण या "मेंटर" को खाते का पासवर्ड, OTP या स्क्रीन का नियंत्रण देना अपने पैसे पर नियंत्रण छोड़ देना है, और कोई सार्वजनिक, प्रलेखित ट्रेडिंग API भी विज्ञापित नहीं है, इसलिए ऐसे हर उपकरण को अनौपचारिक मानकर चलिए। इस बाज़ार को पढ़ने का तरीक़ा ट्रेडिंग सिग्नल वाले पन्ने पर है।

क्या कोई मुफ़्त डेमो है? हाँ: बिना डिपॉज़िट वाला अभ्यास खाता विज्ञापित है, जिसमें दोबारा भरा जा सकने वाला वर्चुअल बैलेंस मिलता है। नए पाठक के लिए यही सबसे काम की सुविधा है, क्योंकि वहाँ यह पता चल जाता है कि तेज़ फ़ैसलों वाला यह ढाँचा आपके स्वभाव से मेल खाता है या नहीं, बिना पैसा भेजे। शर्त एक ही है: वहाँ भी वही रकम-अनुशासन रखिए जो असली खाते पर रखते, वरना आप मंच नहीं, अपनी छूट को परख रहे होंगे। मुफ़्त प्रैक्टिस अकाउंट वाला पन्ना इसे ठीक से बरतने का तरीक़ा बताता है, और जोखिम का पूरा गणित बाइनरी ऑप्शन्स के जोखिम वाले पन्ने पर है।

डेमो से लाइव पर कब जाएँ? इसका कोई तय दिन-गिनती वाला जवाब नहीं है, पर तीन कसौटियाँ काम की हैं। पहली, क्या आप बिना सोचे बता सकते हैं कि मौजूदा पेआउट पर सिर्फ़ बराबरी के लिए दस में से कितने सौदे सही चाहिए? दूसरी, क्या आपने अभ्यास के दौरान अपनी तय सीमा एक बार भी नहीं तोड़ी, ख़ासकर हार की लड़ी के बाद? तीसरी, क्या वह रकम मौजूद है जिसके पूरी तरह चले जाने से आपकी रोज़मर्रा पर असर न पड़े? तीनों का जवाब हाँ न हो, तो लाइव पर जाने की जल्दी करने से कोई फ़ायदा नहीं मिलता, अभ्यास खाता कहीं भागा नहीं जा रहा।

रणनीति बढ़त नहीं देती, अनुशासन देती है, और अनुशासन वही चीज़ है जो इस उत्पाद में सबसे ज़्यादा काम आती है।

भरोसा और सपोर्ट

यहाँ हम न "सुरक्षित" लिखते हैं, न "घोटाला": दोनों फ़ैसले हैं, तथ्य नहीं। जो लिखा जा सकता है वह यह है कि किन परतों पर प्रमाण मौजूद है और किन पर नहीं।

क्या यह सुरक्षित है या घोटाला? इस सवाल को तीन अलग सवालों में तोड़िए, तभी जवाब मिलता है। पहला, मंच की तकनीकी सुरक्षा: यह वही चीज़ है जो आपकी अपनी आदतों पर भी टिकी है: मज़बूत पासवर्ड, दो-चरणीय सुरक्षा, सही पता। दूसरा, पैसे की सुरक्षा, ऑफशोर मंच पर आपका पैसा उसकी अपनी शर्तों और अधिकार-क्षेत्र में रहता है। तीसरा, नियामकीय सहारा, जो अपंजीकृत इकाई के मामले में भारत में मौजूद नहीं होता। घोटाले के आरोपों को कैसे जाँचें, यह अलग विषय है और Pocket Option घोटाले के दावे वाले पन्ने पर खुला है; परतों के हिसाब से आकलन क्या Pocket Option सुरक्षित है वाले पन्ने पर।

कस्टमर केयर से कैसे संपर्क करूँ? जो सत्यापित है वह यह है कि जिन पन्नों को हम पढ़ सके, उन पर कोई भारतीय हेल्पलाइन नंबर प्रकाशित नहीं है; विज्ञापित श्रेणियाँ इन-प्लेटफ़ॉर्म लाइव चैट, ईमेल या टिकट, और ऐप के भीतर की मदद हैं। इसलिए इंटरनेट पर "Pocket Option इंडिया हेल्पलाइन" के नाम से घूमते नंबर एक जाने-पहचाने ठगी-पैटर्न हैं, और हम कोई नंबर नहीं छापते। एक नियम याद रखिए: कोई असली सपोर्ट कभी पासवर्ड, OTP या आपके फ़ोन पर रिमोट कंट्रोल नहीं माँगता। सपोर्ट चैनल वाला पन्ना यही विस्तार से रखता है।

सपोर्ट से बात करने का सबसे उपयोगी तरीक़ा भी दर्ज कर लीजिए, क्योंकि इससे जवाब की गति पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है: मंच के भीतर से ही संपर्क कीजिए, वही ईमेल इस्तेमाल कीजिए जो खाते पर दर्ज है, अपना सवाल एक-दो पंक्तियों में साफ़ लिखिए, और जो भी संदर्भ हो (तारीख़, लेन-देन का पहचान-अंक, स्क्रीन का चित्र) पहले ही संदेश में जोड़ दीजिए। बातचीत का रिकॉर्ड अपने पास रखिए। और अगर किसी बाहरी चैनल या सोशल मीडिया खाते से कोई "सपोर्ट एजेंट" ख़ुद आपसे संपर्क करे, तो यह लगभग हमेशा ठगी का संकेत होता है, चाहे बातचीत कितनी भी पेशेवर लगे।

एफ़िलिएट प्रोग्राम कैसे काम करता है? ऐसे प्रोग्राम श्रेणी के तौर पर मौजूद हैं और आमतौर पर एक रेफ़रल लिंक, राजस्व-हिस्सेदारी या प्रति-ग्राहक भुगतान, और किसी न्यूनतम सीमा पर पेआउट के ढाँचे पर चलते हैं। कोई कमीशन दर या कमाई का आँकड़ा हम नहीं छापते, क्योंकि वह सत्यापित नहीं है। यहाँ एक बात हम अपने बारे में साफ़ कहते हैं: TradeLens जैसे प्रकाशन आमतौर पर एफ़िलिएट साझेदारियों से चलते हैं, और इस साइट का मॉडल भी वही है: फ़िलहाल कोई साझेदारी जुड़ी हुई नहीं है, इसलिए यहाँ कोई साइनअप बटन या रेफ़रल लिंक नहीं मिलेगा। जो भारतीय पाठक ख़ुद ऐसा प्रोग्राम चलाने की सोच रहे हैं, उनके लिए अपने विज्ञापन, प्रकटीकरण और कर तथा विदेशी मुद्रा से जुड़े दायित्व अपनी जगह बने रहते हैं; एफ़िलिएट प्रोग्राम वाला पन्ना इसे ढाँचे के रूप में रखता है।

किसी भी दावे को ख़ुद कैसे परखें? इस साइट से बाहर भी काम आने वाली एक छोटी कसौटी रख लीजिए। पहला सवाल: दावे का स्रोत क्या है, और क्या वह ऑपरेटर का अपना पन्ना है या किसी की राय? दूसरा: क्या वह पन्ना कहीं यह मानता है कि उसके पास कोई जानकारी नहीं: जो पन्ना हर ख़ाली जगह भर देता है, वह आमतौर पर नक़ल कर रहा होता है। तीसरा: क्या उसमें कोई निश्चितता बेची जा रही है, जैसे कोई सफलता-दर, कोई "गारंटीड" तरीक़ा या कोई चालू कोड? चौथा: क्या वह आपसे कुछ ऐसा करने को कह रहा है जो आपकी अपनी पहुँच किसी और को देता है: पासवर्ड, OTP, रिमोट कंट्रोल? इनमें से किसी एक पर भी जवाब गड़बड़ हो, तो बाक़ी पूरा पन्ना पढ़ने की ज़रूरत नहीं रह जाती।

अंत में वही बात जो इस साइट के हर पन्ने पर लौटती है, बिना घुमाए: यह उच्च जोखिम वाला उत्पाद है जिसमें पूँजी पूरी तरह और तेज़ी से जा सकती है, और इस श्रेणी में ज़्यादातर रिटेल अकाउंट घाटे में रहते हैं। ऊपर की सारी जानकारी 27 जुलाई 2026 को पढ़े गए सार्वजनिक पन्नों पर आधारित है और बिना सूचना बदल सकती है, फ़ैसले से पहले मौजूदा शर्तें मंच के अपने पन्नों पर देख लीजिए।

"सुरक्षित है या नहीं" का जवाब तभी मिलता है जब सवाल को तीन हिस्सों में तोड़ा जाए: मंच, पैसा, और सहारा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस साइट पर कुल कितने पन्ने हैं और शुरुआत कहाँ से करूँ?

हिंदी संस्करण में तीस पन्ने हैं, जो पाँच हिस्सों में बँटे हैं: वैधता और नियमन, पहुँच और ऐप, पैसा, ट्रेडिंग और सीखना, तथा भरोसा और सपोर्ट। बिल्कुल नए पाठक के लिए सही क्रम यह है: पहले यह समझिए कि उत्पाद क्या है, फिर जोखिम का गणित, फिर वैधता की स्थिति, और उसके बाद ही ऐप या पैसे वाले पन्ने।

आप कई सवालों के जवाब में आँकड़ा क्यों नहीं देते?

क्योंकि हम केवल वही छापते हैं जो ऑपरेटर के अपने पन्नों पर पढ़ा जा सका। न्यूनतम डिपॉज़िट, पेआउट प्रतिशत, बोनस की शर्तें, प्रोसेसिंग समय और डेमो बैलेंस जैसे आँकड़े या तो गतिशील हैं या सत्यापित नहीं, इसलिए उन्हें बैंड में लिखते हैं या छोड़ देते हैं। बिना प्रमाण नंबर छापना पाठक को ग़लत भरोसा देता है, मदद नहीं।

क्या TradeLens ने ख़ुद खाता खोलकर मंच आज़माया है?

नहीं। हमने कोई खाता खोला, उसमें पैसा डाला या उस पर सौदे नहीं किए, इसलिए आप इस साइट पर कहीं "हमने परखा" या "हमारे अनुभव में" जैसी बात नहीं पढ़ेंगे। हमारा काम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को पढ़ना, उसे जाँचना और वह ढाँचा देना है जिससे आप ख़ुद मूल्यांकन कर सकें।

अगर मेरा सवाल यहाँ नहीं है तो?

ज़्यादातर सवाल किसी न किसी विषय-पन्ने पर विस्तार से खुले हैं: वैधता, SEBI और RBI, टैक्स, लॉगिन, ऐप, वेरिफ़िकेशन, डिपॉज़िट, निकासी, बोनस, प्रोमो कोड, रणनीति, सिग्नल, डेमो, सुरक्षा, सपोर्ट, एफ़िलिएट और तुलना वाले पन्ने। जो जानकारी मंच की अपनी शर्तों से जुड़ी है, उसका सबसे भरोसेमंद स्रोत हमेशा ऑपरेटर के अपने मौजूदा पन्ने रहेंगे।

क्या इस साइट पर कहीं साइनअप या रेफ़रल लिंक है?

नहीं। इस समय कोई साझेदारी जुड़ी हुई नहीं है, इसलिए आपको यहाँ कोई साइनअप बटन, कोई रेफ़रल लिंक और कोई प्रचार-कोड नहीं मिलेगा। इस श्रेणी के प्रकाशन आमतौर पर एफ़िलिएट मॉडल पर चलते हैं और हम इसे छिपाते नहीं; जहाँ ऐसा कोई संबंध बनेगा, वह पन्ने पर साफ़ लिखा जाएगा।

क्या यहाँ दिए जवाब समय के साथ बदलेंगे?

हाँ, और यह मान लेना ही सही है। शर्तें, भुगतान के रास्ते, बोनस की भाषा और उपलब्धता बिना सूचना बदल सकती हैं, इसलिए हम हर जगह जाँच की तारीख़ दर्ज करते हैं। जिस भी बात पर पैसा टिकने वाला हो, उसे फ़ैसले के ठीक पहले मंच पर एक बार देख लेना सबसे सस्ती सावधानी है।